दुनिया मेरे आगे: मौन की नदी
साथ का सबसे सुंदर पल वह होता है जब आप साथ हों और पैदल चल रहे हों। संवाद स्थगित। भीतर भी बाहर भी। हम दोनों उस रोज ऐसे ही साथ में थे। कदम आगे बढ़ रहे थे और मन उन्हीं कदमों में लिपटा किलक रहा था।
from Jansattaराष्ट्रीय – Jansatta https://ift.tt/2Mjbd10
from Jansattaराष्ट्रीय – Jansatta https://ift.tt/2Mjbd10

No comments
Thanks for your feedback.